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इक 'इंशा' नाम का दीवाना - Ik Insha Naam ka Deewana | इब्न-ए-इंशा (Ibn-e-Insha)

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काश! मैं वृक्ष होता - Kaash..! Mai Vriksh Hota | रुदन करता पेड़ - Rudan Karta Ped

काश! मैं वृक्ष होता - Kaash! Mai Vriksh Hota | रुदन करता पेड़ - Rudan Karta Ped काश! मैं वृक्ष होता रंग-बिरंगे पुष्प खिलाता मनभावन खुशबू फैलाता। बिन मांगे ही फल देता कुछ न अपने लिए बचाता। परोपकार में होता दक्ष काश! मैं बन जाऊँ वृक्ष। प्रेम-सुधा बरसात सब पर चाहे खग हो , चाहे चौपाया। नव जीवन भर देती सब में मेरी ठंडी, शीतल छाया। करता न्याय होकर निष्पक्ष काश! मैं बन जाऊँ वृक्ष। रुदन करता पेड़ मैंने पेड़ को रोते देखा उसका सब कुछ खोते देखा। भुजा समान उसकी डाली को उससे अलग होते देखा। सिसकी हर पत्ता भरता है मुँह से आह! भी न करता है। जड़ों से आँसू बहते हैं दुख की कहानी कहते हैं। अब तो छोड़ो हमें सताना अब न मिलेगा मौसम सुहाना। अपने बच्चों के लिए मैंने मानव को दुख का बीज बोते देखा। हाँ! मैंने पेड़ को रोते देखा उसका सब कुछ खोते देखा । डॉ. मुल्ला आदम अली https://www.drmullaadamali.com तिरुपति - आंध्र प्रदेश #GUEST_POST

Ab Uski Yaad Raat Din - अब उसकी याद रात दिन | Ahmad Faraz : अहमद फ़राज़

Ab Uski Yaad Raat Din - अब उसकी याद रात दिन अहमद फ़राज़ की मशहूर शायरी - Ahmad Faraz Ishq Shayari भले दिनों की बात थी भली सी एक शक्ल थी ना ये कि हुस्ने ताम हो ना देखने में आम सी ना ये कि वो चले तो कहकशां सी रहगुजर लगे मगर वो साथ हो तो फिर भला भला सफ़र लगे कोई भी रुत हो उसकी छब फ़जा का रंग रूप थी वो गर्मियों की छांव थी वो सर्दियों की धूप थी ना मुद्दतों जुदा रहे ना साथ सुबहो शाम हो ना रिश्ता-ए-वफ़ा पे ज़िद ना ये कि इज्ने आम हो ना ऐसी खुश लिबासियां कि सादगी हया करे ना इतनी बेतकल्लुफ़ी की आईना हया करे ना इखतिलात में वो रम कि बदमजा हो ख्वाहिशें ना इस कदर सुपुर्दगी कि ज़िच करे नवाजिशें ना आशिकी ज़ुनून की कि ज़िन्दगी अजाब हो ना इस कदर कठोरपन कि दोस्ती खराब हो कभी तो बात भी खफ़ी कभी सुकूत भी सुखन कभी तो किश्ते ज़ाफ़रां कभी उदासियों का बन सुना है एक उम्र है मुआमलाते दिल की भी विसाले-जाँफ़िजा तो क्या फ़िराके-जाँ-गुसल की भी सो एक रोज क्या हुआ वफ़ा पे बहस छिड़ गई मैं इश्क को अमर कहूं वो मेरी ज़िद से चिढ़ गई मैं इश्क का असीर था वो इश्क को कफ़स कहे कि उम्र भर के साथ को वो बदतर अज़ हवस कहे शजर हजर नह...

Happy Birthday Wishes in Hindi | जन्मदिन की शुभकामनाएं संदेश, शायरी और कोट्स

Happy Birthday Wishes in Hindi | जन्मदिन की शुभकामनाएं संदेश, शायरी और कोट्स Introduction जन्मदिन किसी भी व्यक्ति के जीवन में खास दिन होता है। यह न सिर्फ उनके लिए खुशी का अवसर होता है बल्कि उनके करीबियों के लिए भी महत्वपूर्ण दिन होता है। जन्मदिन के मौके पर दिल से दी गई शुभकामनाएं रिश्तों को और मजबूत बनाती हैं। इस ब्लॉग में आपको बेहतरीन Happy Birthday Wishes in Hindi , शायरी, कोट्स, स्टेटस और संदेश मिलेंगे जिन्हें आप अपने परिवार, दोस्तों, प्रेमी-प्रेमिका या किसी खास व्यक्ति को भेज सकते हैं। 1. सामान्य जन्मदिन शुभकामनाएं (Simple Happy Birthday Wishes in Hindi) ✨ "जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं! आपका जीवन खुशियों से भरा रहे।" ✨ "भगवान आपको लंबी उम्र, सफलता और अपार खुशियां दें!" ✨ "आपका हर दिन खास हो और जीवन में अपार सफलता मिले।" ✨ "खुश रहो तुम हमेशा यही है मेरी दुआ, जन्मदिन मुबारक हो।" ✨ "हर दिन आपका नाम ऊँचा हो, खुशियों से भरा हो आपका हर पल।" 2. माता-पिता के लिए जन्मदिन की शुभकामनाएं (Birthday Wishes for Parents in Hindi) माँ के लिए: “माँ, ...

Holi Par Hindi Poems | होली पर कविता - Holi Par Kavita

होली पर कविता- Holi Par Hindi Poems Holi Par Hindi Kavita    Hindi Poem on  Holi  Festival होली पर कविता रंगों का त्योहार है होली खुशियों की बौछार है होली लाल गुलाबी पीले देखो रंग सभी रंगीले देखों पिचकारी भर-भर ले आते इक दूजे पर सभी चलाते होली पर अब ऐसा हाल हर चेहरे पर आज गुलाल आओ यारो इसी बहाने दुश्मन को भी चलो मनाने -गुलशन मदान 2. Holi Poetry Hindi   देखो-देखो होली है आई चुन्नू-मुन्नू के चेहरे पर खुशियां हैं आई मौसम ने ली है अंगड़ाई। शीत ऋतु की हो रही है बिदाई ग्रीष्म ऋतु की आहट है आई सूरज की किरणों ने उष्णता है दिखलाई देखो-देखो होली है आई। बच्चों ने होली की योजना खूब है बनाई रंगबिरंगी पिचकारियां बाबा से है मंगवाई रंगों और गुलाल की सूची है रखवाई जिसकी काका ने अनुमति है नहीं दिलवाई। दादाजी ने प्राकृतिक रंगों की बात है समझाई जिस पर सभी बच्चों ने सहमति है जतलाई बच्चों ने खूब मिठाइयां खाकर शहर में खूब धूम है मचाई देखो-देखो होली है आई। होली ने भक्त प्रहलाद की स्मृति है करवाई बच्चों और बड़ों ने कचरे और अवगुणों की होली है जलाई होली ने कर दी है अनबन की सफाई जिसने...

Famous Poems

महाभारत पर रोंगटे खड़े कर देने वाली हिंदी कविता - Mahabharata Poem On Arjuna

|| महाभारत पर रोंगटे खड़े कर देने वाली कविता || || Mahabharata Poem On Arjuna ||   तलवार, धनुष और पैदल सैनिक कुरुक्षेत्र में खड़े हुए, रक्त पिपासु महारथी इक दूजे सम्मुख अड़े हुए | कई लाख सेना के सम्मुख पांडव पाँच बिचारे थे, एक तरफ थे योद्धा सब, एक तरफ समय के मारे थे | महा-समर की प्रतिक्षा में सारे ताक रहे थे जी, और पार्थ के रथ को केशव स्वयं हाँक रहे थे जी ||    रणभूमि के सभी नजारे देखन में कुछ खास लगे, माधव ने अर्जुन को देखा, अर्जुन उन्हें  उदास लगे | कुरुक्षेत्र का महासमर एक पल में तभी सजा डाला, पांचजन्य  उठा कृष्ण ने मुख से लगा बजा डाला | हुआ शंखनाद जैसे ही सब का गर्जन शुरु हुआ, रक्त बिखरना हुआ शुरु और सबका मर्दन शुरु हुआ | कहा कृष्ण ने उठ पार्थ और एक आँख को मीच जड़ा, गाण्डिव पर रख बाणों को प्रत्यंचा को खींच जड़ा | आज दिखा दे रणभूमि में योद्धा की तासीर यहाँ, इस धरती पर कोई नहीं, अर्जुन के जैसा वीर यहाँ ||    सुनी बात माधव की तो अर्जुन का चेहरा उतर गया, ...

Kahani Karn Ki Poem Lyrics By Abhi Munde (Psycho Shayar) | कहानी कर्ण की - Karna Par Hindi Kavita

Kahani Karn Ki Poem Lyrics By Psycho Shayar   कहानी कर्ण की - Karna Par Hindi Kavita पांडवों  को तुम रखो, मैं  कौरवों की भी ड़ से , तिलक-शिकस्त के बीच में जो टूटे ना वो रीड़ मैं | सूरज का अंश हो के फिर भी हूँ अछूत मैं , आर्यवर्त को जीत ले ऐसा हूँ सूत पूत मैं |   कुंती पुत्र हूँ, मगर न हूँ उसी को प्रिय मैं, इंद्र मांगे भीख जिससे ऐसा हूँ क्षत्रिय मैं ||   कुंती पुत्र हूँ, मगर न हूँ उसी को प्रिय मैं, इंद्र मांगे भीख जिससे ऐसा हूँ क्षत्रिय मैं ||   आओ मैं बताऊँ महाभारत के सारे पात्र ये, भोले की सारी लीला थी किशन के हाथ सूत्र थे | बलशाली बताया जिसे सारे राजपुत्र थे, काबिल दिखाया बस लोगों को ऊँची गोत्र के ||   सोने को पिघलाकर डाला शोन तेरे कंठ में , नीची जाती हो के किया वेद का पठंतु ने | यही था गुनाह तेरा, तू सारथी का अंश था, तो क्यों छिपे मेरे पीछे, मैं भी उसी का वंश था ?   यही था गुनाह तेरा, तू सारथी का अंश था, तो क्यों छिपे मेरे पीछे, मैं भी उसी का वंश था ? ऊँच-नीच की ये जड़ वो अहंकारी द्रोण था, वीरों की उसकी सूची में, अर्...

सादगी तो हमारी जरा देखिये | Saadgi To Hamari Zara Dekhiye Lyrics | Nusrat Fateh Ali Khan Sahab

Saadgi To Hamari Zara Dekhiye Lyrics सादगी तो हमारी जरा देखिये   सादगी तो हमारी जरा देखिये,  एतबार आपके वादे पे कर लिया | मस्ती में इक हसीं को ख़ुदा कह गए हैं हम,  जो कुछ भी कह गए वज़ा कह गए हैं हम  || बारस्तगी तो देखो हमारे खुलूश कि,  किस सादगी से तुमको ख़ुदा कह गए हैं हम || किस शौक किस तमन्ना किस दर्ज़ा सादगी से,  हम करते हैं आपकी शिकायत आपही से || तेरे अताब के रूदाद हो गए हैं हम,  बड़े खलूस से बर्बाद हो गए हैं हम ||

सच है, विपत्ति जब आती है, कायर को ही दहलाती है - Sach Hai Vipatti Jab Aati Hai

  सच है, विपत्ति जब आती है, कायर को ही दहलाती है रामधारी सिंह "दिनकर" हिंदी कविता दिनकर की हिंदी कविता Sach Hai Vipatti Jab Aati Hai सच है, विपत्ति जब आती है, कायर को ही दहलाती है, शूरमा नहीं विचलित होते, क्षण एक नहीं धीरज खोते, विघ्नों को गले लगाते हैं, काँटों में राह बनाते हैं। मुख से न कभी उफ कहते हैं, संकट का चरण न गहते हैं, जो आ पड़ता सब सहते हैं, उद्योग-निरत नित रहते हैं, शूलों का मूल नसाने को, बढ़ खुद विपत्ति पर छाने को। है कौन विघ्न ऐसा जग में, टिक सके वीर नर के मग में ? खम ठोंक ठेलता है जब नर , पर्वत के जाते पाँव उखड़। मानव जब जोर लगाता है, पत्थर पानी बन जाता है । Sach Hai Vipatti Jab Aati Hai गुण बड़े एक से एक प्रखर, हैं छिपे मानवों के भीतर, मेंहदी में जैसे लाली हो, वर्तिका-बीच उजियाली हो। बत्ती जो नहीं जलाता है, रोशनी नहीं वह पाता है। पीसा जाता जब इक्षु-दण्ड , झरती रस की धारा अखण्ड , मेंहदी जब सहती है प्रहार, बनती ललनाओं का सिंगार। जब फूल पिरोये जाते हैं, हम उनको गले लगाते हैं। वसुधा का नेता कौन हुआ? भूखण्ड-विजेता कौन हुआ ? अतुलित यश क्रेता कौन हुआ? नव-धर्म प्...

अरे! रणभूमि में छल करते हो, तुम कैसे भगवान हुए ! | Karna Par Hindi Kavita | Ranbhoomi Me Chhal Karte

अरे! रणभूमि में छल करते हो, तुम कैसे भगवान हुए ! || Karna Par Hindi Kavita || || Poem On Karna || अरे! रणभूमि में छल करते हो, तुम कैसे भगवान हुए ! | Karna Par Hindi Kavita | Ranbhoomi Me Chhal Karte सारा जीवन श्रापित-श्रापित , हर रिश्ता बेनाम कहो, मुझको ही छलने के खातिर मुरली वाले श्याम कहो, तो किसे लिखूं मैं प्रेम की पाती, किसे लिखूं मैं प्रेम की पाती, कैसे-कैसे इंसान हुए, अरे! रणभूमि में छल करते हो, तुम कैसे भगवान हुए ! अरे! रणभूमि में छल करते हो, तुम कैसे भगवान हुए ! | Karna Par Hindi Kavita | Ranbhoomi Me Chhal Karte || माँ को कर्ण लिखता है || अरे! रणभूमि में छल करते हो, तुम कैसे भगवान हुए ! | Karna Par Hindi Kavita | Ranbhoomi Me Chhal Karte कि मन कहता है, मन करता है, कुछ तो माँ के नाम लिखूं , एक मेरी जननी को लिख दूँ, एक धरती के नाम लिखूं , प्रश्न बड़ा है मौन खड़ा - धरती संताप नहीं देती, और धरती मेरी माँ होती तो , मुझको श्राप नहीं देती | तो जननी माँ को वचन दिया है, जननी माँ को वचन दिया है, पांडव का काल नहीं हूँ मैं, अरे! जो बेटा गंगा में छोड...