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इक 'इंशा' नाम का दीवाना - Ik Insha Naam ka Deewana | इब्न-ए-इंशा (Ibn-e-Insha)

मेरे भारत में - Hindi Poems On India | अक्षय नाथ मिश्रा

😟मेरे भारत में😯

|| भारत पर हिंदी कविता ||

|| Hindi Poems On India ||

|| Hindi Poems On India ||

कैसा दस्तूर लागू है मेरे भारत में,

 जो ज़नतंत्र की बात है मेरे भारत में |


अफ़वाह है, या है कोई सच्चाई इसमें,
 मैं हिन्दू हूँ, ग़र झूठी है ज़ुबाँ मुस्लिमों के मेरे भारत में |

अपाहिज ही अपाहिज बनते जा रहे हैं लोग,
जाति के खेल से,  टूट रहे हैं अपने ही मेरे भारत में ||
अक्षय नाथ मिश्रा
आतंकवाद से लड़ते-लड़ते हम पाकिस्तान जा पहुँचे,
सच्चे भारतीय ही, कहलाते हैं आतंकवादी मेरे भारत में |

कागज़ों की बुनियाद भी है अब नफ़रत की नींव पर,
क़लम भी चलती है, पर सच छुपाने को मेरे भारत में ||

भेड़ियों का झुंड है, इसाँ बनने की कोशिश न करना,
ख़ौफ़ ही ख़ौफ़, ख़ौफ़ की सियासत चलती है मेरे भारत में |

तंत्र हो चुका है बेअसर, जन भी हैं बे-ख़बर,
अधिकार है अंधेरा में, कहलाता जनतंत्र यही है मेरे भारत में ||

अक्षय नाथ मिश्रा

|| भारत पर हिंदी कविता ||

|| Hindi Poems On India ||

Famous Poems

महाभारत पर रोंगटे खड़े कर देने वाली हिंदी कविता - Mahabharata Poem On Arjuna

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Kahani Karn Ki Poem Lyrics By Abhi Munde (Psycho Shayar) | कहानी कर्ण की - Karna Par Hindi Kavita

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सच है, विपत्ति जब आती है, कायर को ही दहलाती है - Sach Hai Vipatti Jab Aati Hai

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सादगी तो हमारी जरा देखिये | Saadgi To Hamari Zara Dekhiye Lyrics | Nusrat Fateh Ali Khan Sahab

Saadgi To Hamari Zara Dekhiye Lyrics सादगी तो हमारी जरा देखिये   सादगी तो हमारी जरा देखिये,  एतबार आपके वादे पे कर लिया | मस्ती में इक हसीं को ख़ुदा कह गए हैं हम,  जो कुछ भी कह गए वज़ा कह गए हैं हम  || बारस्तगी तो देखो हमारे खुलूश कि,  किस सादगी से तुमको ख़ुदा कह गए हैं हम || किस शौक किस तमन्ना किस दर्ज़ा सादगी से,  हम करते हैं आपकी शिकायत आपही से || तेरे अताब के रूदाद हो गए हैं हम,  बड़े खलूस से बर्बाद हो गए हैं हम ||

अरे! रणभूमि में छल करते हो, तुम कैसे भगवान हुए ! | Karna Par Hindi Kavita | Ranbhoomi Me Chhal Karte

अरे! रणभूमि में छल करते हो, तुम कैसे भगवान हुए ! || Karna Par Hindi Kavita || || Poem On Karna || अरे! रणभूमि में छल करते हो, तुम कैसे भगवान हुए ! | Karna Par Hindi Kavita | Ranbhoomi Me Chhal Karte सारा जीवन श्रापित-श्रापित , हर रिश्ता बेनाम कहो, मुझको ही छलने के खातिर मुरली वाले श्याम कहो, तो किसे लिखूं मैं प्रेम की पाती, किसे लिखूं मैं प्रेम की पाती, कैसे-कैसे इंसान हुए, अरे! रणभूमि में छल करते हो, तुम कैसे भगवान हुए ! अरे! रणभूमि में छल करते हो, तुम कैसे भगवान हुए ! | Karna Par Hindi Kavita | Ranbhoomi Me Chhal Karte || माँ को कर्ण लिखता है || अरे! रणभूमि में छल करते हो, तुम कैसे भगवान हुए ! | Karna Par Hindi Kavita | Ranbhoomi Me Chhal Karte कि मन कहता है, मन करता है, कुछ तो माँ के नाम लिखूं , एक मेरी जननी को लिख दूँ, एक धरती के नाम लिखूं , प्रश्न बड़ा है मौन खड़ा - धरती संताप नहीं देती, और धरती मेरी माँ होती तो , मुझको श्राप नहीं देती | तो जननी माँ को वचन दिया है, जननी माँ को वचन दिया है, पांडव का काल नहीं हूँ मैं, अरे! जो बेटा गंगा में छोड...